केरल विधानसभा ने सोमवार को ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के पद से हटाने और सीईसी का चयन करने वाली चयन समिति में सुधार की मांग करते हुए एक प्रस्ताव अपनाया।

ऐसा प्रस्ताव पारित करने वाला दक्षिणी राज्य भारत का पहला राज्य है।
विधानसभा प्रक्रियाओं के नियम 118 के तहत मुख्यमंत्री वीडी सतीसन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के विधायकों ने समर्थन दिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तीन विधायकों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.
प्रस्ताव की प्रमुख मांगों में से एक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में अनियमितताओं को संबोधित करना और बाहर किए गए सभी पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार बहाल करना है।
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इसने प्रधान मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने के लिए चयन समिति के पुनर्गठन की भी मांग की। वर्तमान में, संसद द्वारा पारित 2023 कानून के तहत, समिति सीजेआई को बाहर करती है और इसमें पीएम द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री शामिल होता है।
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सीएम सतीसन ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मतदान का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। केरलम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए दृढ़ता से खड़ा है।”







